राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सुझाव दिया है कि यह बहुत अच्छा होगा कि कोई कानून बनाने के लिए केंद्र व राज्य सरकारें अध्यादेश का तरीका अपनाने से परहेज करें। उन्होंने कानून बनाने के लिए राजनीतिक आम सहमति को जरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों की इस सोच से कोई फायदा नहीं होने वाला कि आज मैं सत्ता में हूं तो अध्यादेश ला सकता हूं। नायडू ने यह विचार उस समय व्यक्त किया जब विपक्ष के एक सदस्य ने आशंका जताई कि कानून बनाने के लिए केंद्र अध्यादेश का सहारा ले सकता है।

राज्यसभा सभापति ने कहा कोई भी कानून राजनीतिक दलों की सहमति से बनाना ही उचित होगा

नायडू ने कहा कि अध्यादेश की प्रक्रिया के संदर्भ में लोकतंत्र की भावना पर पड़ने वाले असर का अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार को कानून बनाने में जहां तक संभव हो विधायी प्रक्रिया को ही अपनाना चाहिए। भाकपा सदस्य बिनय विश्वम ने कहा कि मौजूदा सरकार कानून बनाने के लिए संसद को दरकिनार कर अध्यादेश का रास्ता अपनाने में विश्वास करती है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रविधान) दूसरा संशोधन विधेयक 2021 पर चर्चा करते हुए विश्वम ने कहा कि राजग सरकार के पहले कार्यकाल में 42 और दूसरे कार्यकाल में अब तक 77 अध्यादेश लाए जा चुके हैं। दोनों कार्यकालों में कुल 59 अध्यादेशों को कानून की शक्ल दी गई। उन्होंने सभापति से आग्रह किया कि वे सरकार को कड़ी हिदायत दें कि अध्यादेश के रास्ते को परंपरा न बनाए।

इस पर सभापति ने कहा कि यदि केंद्र व सभी राज्य सरकारें अध्यादेश न लाने पर सहमत हों तो यह बहुत अच्छा होगा। कोई भी कानून राजनीतिक दलों की सहमति से बनाना ही उचित होगा। सदस्यों से लोकतंत्र की भावना को समझने का आग्रह करते हुए नायडू ने कहा कि जिन लोगों ने अध्यादेश का विरोध किया वे सभी लोकतंत्र की भावना को भली भांति समझते हैं। चर्चा से पूर्व कांग्रेस के शक्तिकांत गोहिल ने नियम 66(ए123) के तहत व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि अध्यादेश लाने की शक्ति का प्रयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए।

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