गुरु रवींद्र नाथ टैगोर की बीरभूम पर जोरेर टक्कर होबे

तृणमूल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अनुव्रत मंडल उर्फ केष्टो दा की पहचान बाहुबली की है। 2016 के विधानसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग ने उन्हें नजरबंद किया था। इस बार केष्टो दा खेला होबे का नारा लगा रहे हैं।

कवि गुरु रवींद्र नाथ टैगोर ने बीरभूम के शांति निकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की। हरेक साल होली पर होने वाले दोल उत्सव का गवाह बनने देश-विदेश से लोग आते हैं। इस बार कोरोना के कारण दोल उत्सव का आधिकारिक आयोजन नहीं होगा। दोल उत्सव के आयोजन पर लगी रोक से निराशा है। मगर, चुनावी त्योहार के कारण उत्साह कम नहीं। बोलपुर के शांति निकेतन के नजदीक सड़क पर बेफिक्र टहल रहे राहुल चटर्जी कहते हैं, दादा ऐय बारो दीदी आसबे। थोड़ा आगे बढ़ते ही नानूर सीमा पर बैठे बिप्लब और देवेंदु दावा करते हैं, एय बार पोदो फूल फूटबे अर्थात इस बार कमल खिलेगा। सिउड़ी चौरोह के समीप गुजर रहे साइकिल सवार समर हाजरा से पूछने पर कहते हैं, जोरेर टक्कर होबे। खेला होबे।

बीरभूम वीरों की भूमि है, सांस्कृतिक विरासत भी उतना समृद्धि। यहां शांति निकेतन है। बकरेश्वर में अग्नि कुंड, सूर्य कुंड जैसे कई झरने हैं जहां का पानी 60 डिग्री सेल्सियस तक गरम रहता है हमेशा। सूफी संत हजरत दाता महबूब साह बाली का मकबरा भी है जो सामाजिक सद्भाव की मिसाल है। विधानसभा चुनाव की बात करें तो आम लोग बिल्कुल शांत है। शांति निकेतन की तरह। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और समर्थक विरोधियों पर उबल रहे हैं। अग्निकुंड के गरम पानी की भांति। तृणमूल के इस सियासी किला को ध्वस्त करने के लिए भाजपा के लोग वो सब कुछ करने को तैयार है जो मतदाताओं को उनकी ओर कर दे। तृणमूल का यह सियासी गढ़ है। भाजपा के लोगों को देखते ही तृणमूल वालों की जुबान पर यही नारा आता है, ‘खेला होबे।’

बीते लोकसभा चुनाव में बंगाल में भाजपा का प्रदर्शन शानदार रहा है। हालांकि, बीरभूम और बोलपुर की सीट पर कब्जा बनाए रखने में तृणमूल कामयाब रही। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व भी कवि गुरु के नाते विशेष पहचान रखने वाले बीरभूम के प्रति बेहद संजीदा है। गृह मंत्री अमित शाह से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बीरभूम में कई बार आगमन हो चुका है। जवाब में ममता बनर्जी ने भी यहां पांच किमी लंबी पदयात्रा की है जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। बीरभूम की पहचान पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से भी है जो मिराटी जैसे गांव से निकल कर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने में कामयाब रहे। भाजपा, तृणमूल के साथ वाम मोर्चा एवं कांग्रेस गठबंधन के नेताओं को उम्मीद है कि बीरभूम उन्हें भी सर्वोच्च स्थान दिलाएगी।
लोकसभा चुनाव में बढ़त से भाजपा को उम्मीदें :

बीरभूम जिले में बीरभूम और बोलपुर लोकसभा क्षेत्र के अधिकतर हिस्से आते हैं। लोकसभा चुनाव में तृणमूल को कामयाबी मिली। हालांकि, पांच विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा को बढ़त हासिल हुई थी। इसी कारण भाजपाई बमबम हें और उनकी उम्मीदें आसमां पर है। 2016 के विधानसभा चुनाव की बात करे तो बीरभूम के 11 विधानसभा क्षेत्रों में नौ पर तृणमूल की जीत हुई थी। वाम-कांग्रेस गठबंधन ने नानूर एवं हंसन सीट पर जीत हासिल की थी।

बाहुबली केष्टो दा को चुनाव आयोग ने किया था नजरबंद :

तृणमूल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अनुव्रत मंडल उर्फ केष्टो दा की पहचान बाहुबली की है। 2016 के विधानसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग ने उन्हें नजरबंद किया था। इस बार केष्टो दा खेला होबे का नारा लगा रहे हैं।

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