जब भी कोई इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट खरीदते हैं या ऑनलाइन मंगाते हैं, तो उसके साथ एक मैनुअल मिलता है। उसमें उस प्रोडक्ट के बारे में सारी जानकारियां दी गई होती हैं कि उसे कैसे इस्तेमाल करना है। उसमें क्या खूबियां हैं। क्या सावधानी बरतनी है आदि। इस तरह के मैनुअल का मकसद ही होता है ग्राहकों को संबंधित प्रोडक्ट की तकनीक से अवगत कराना। आज अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियां प्रोडक्ट मैनुअल तैयार कराने के लिए टेक्निकल राइटर्स की मदद ले रही हैं।

क्या है टेक्निकल राइटिंग?: टेक्निकल राइटिंग के तहत लेखकों को तकनीकी जानकारियों को सरल और आसान भाषा में अपने क्लाइंट या टारगेट ऑडिएंस तक पहुंचाना होता है। इसके लिए उन्हें पहले शोध करना होता है। फिर कॉन्सेप्ट तैयार करने, डिजाइनिंग से लेकर डॉक्यूमेंट क्रिएट करने तक की सारी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। इन्हें प्रोडक्ट मैनुअल्स और वेबसाइट्स के लिए कंटेंट डेवलप करने से लेकर इंस्टालेशन गाइड, ऑनलाइन ट्यूटोरियल्स और एंड यूजर्स के लिए हेल्प फाइल्स तैयार करनी होती है।

  • शैक्षिक योग्यता: टेक्निकल राइटिंग के लिए किसी भी स्ट्रीम में स्नातक होना जरूरी है यानी इस क्षेत्र में किसी खास शैक्षिक योग्यता की दरकार नहीं है। हां, टेक्निकल राइटर्स की विज्ञान और टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी के साथ-साथ अंग्रेजी पर भी मजबूत पकड़ होनी जरूरी है।
  • बेसिक स्किल्स: इस क्षेत्र में सफलता के लिए कंप्यूटर का व्यावहारिक ज्ञान होने के साथ-साथ लिखने की क्षमता होनी चाहिए। अपने आइडियाज को ग्राफिक्स के जरिए पेश करना आना चाहिए। इसके साथ ही अगर आइटी का बेसिक बैकग्राउंड, धारदार कम्युनिकेशन स्किल और ताíकक ढंग से समस्याओं का समाधान निकालने का हुनर होगा, तो कामयाबी की राह पर आसानी से आगे बढ़ सकते हैं। जहां तक टेक्निकल स्किल्स की बात है, तो जिनके पास एमएस वर्ड, पॉवर प्वाइंट, फोटोशॉप आदि टूल्स की जानकारी होगी, उनके लिए आगे बढ़ने की राह आसान होगी।
  • अवसर अनेक: टेक्निकल राइटिंग एक विशाल क्षेत्र है। इसमें एसोसिएट टेक्निकल राइटर के तौर पर करियर की शुरुआत होती है। लेकिन चार से पांच साल के अनुभव के बाद आप टीम लीडर की भूमिका में काम कर सकते हैं।
  • सैलरी: टेक्निकल राइटिंग फील्ड में शुरुआती सैलरी 2.75 से 3.2 लाख रुपये सालाना हो सकती है। जैसे-जैसे आपका एक्सपीरियंस बढ़ेगा, सैलरी 12 लाख रुपये सालाना या उससे ज्यादा हो सकती है।

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