भारत में है कुछ ज्यादा ही लोकतंत्र इसलिए कड़े सुधार लागू करना हो जाता है कठिन: Niti Aayog CEO

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि भारत में कड़े सुधारों को लागू करना कठिन होता है क्योंकि यहां काफी अधिक लोकतंत्र है। कांत ने मंगलवार को यह बात कही। कांत का कहना था कि भारत में सुधारों की आवश्यकता है जिससे इसे प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि भारत में कड़े सुधारों को लागू करना कठिन होता है, क्योंकि यहां काफी अधिक लोकतंत्र है। कांत ने मंगलवार को यह बात कही। कांत का कहना था कि भारत में सुधारों की आवश्यकता है, जिससे इसे प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पहली बार खनन, कोयला, श्रम, कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में कड़े सुधारों को आगे बढ़ाया है और अब राज्यों को सुधारों के अगले चरण को आगे बढ़ाना चाहिए। कांत ने एक पत्रिका के कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए यह बात कही।

कांत ने अपने संबोधन में आगे कहा, ‘भारत में कड़े सुधारों को लागू करना काफी मुश्किल है। इसका कारण यह है कि यहां लोकतंत्र कुछ ज्यादा ही है। भारत में खनन, कोयला, श्रम, कृषि आदि क्षेत्रों के सुधारों को आगे बढ़ाने के लिये राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है और अभी भी कई ऐसे सुधार हैं, जिन्हें आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मौजूदा सरकार ने कड़े सुधारों को लागू करने के लिये राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखायी है।’ कांत ने साथ ही कहा कि हम कड़े सुधारों के बगैर चीन के साथ आसानी से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। कांत ने कहा कि अगले दौर का सुधार अब राज्यों की तरफ से किये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘यदि 10-12 राज्य उच्च दर से ग्रोथ करेंगे, तो स्वत: ही भारत उच्च दर से ग्रोथ करेगा। हमने केंद्र शासित प्रदेशों से वितरण कंपनियों के निजीकरण के लिये कहा है। वितरण कंपनियों को अधिक प्रतिस्पर्धी होना चाहिए और सस्ती बिजली उपलब्ध करानी चाहिए।’ कृषि क्षेत्र से जुड़े सुधारों पर कांत ने कहा, ‘हमें यह समझना जरूरी है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था जारी रहेगी, मंडियों में भी पूर्व की भांति काम होता रहेगा। किसानों के पास अपनी पसंद के हिसाब से अपनी फसल बेचने का विकल्प होना चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें ही लाभ होगा।

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