दीपक के ऊपर गुम्बद में तेल भरकर दिये को ऊपर करते हुए पलट कर रख देते हैं, गुम्बद की टोंटी में से तेल टपककर दिया भर जाता है, जैसे ही दिया भर जाता है वैसे ही टोंटी में से तेल की धार कम होकर स्वत: बंद हो जाती है…

और जब दिये का तेल कम होने लगता है पुन: टोंटी का तेल टपकना शुरू हो जाता है। यह दिया लगातार बारह से चौबीस घंटे जल सकता है, इसे निर्माण किया है नेशनल मेरिट एवार्ड से सम्मानित कुम्हार पारा कोंडागांव (बस्तर) बिहार राज्य निवासी श्री अशोक चक्रधारी जी ने।।

ab2news उसके इस अद्भुत आविष्कार की तहे दिलसे तारीफ करता है।

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