मंगल पर भेजे गए हेलीकॉप्‍टर ड्रोन Ingenuity से हमेशा के लिए जुड़ गया इस भारतीय मूल की युवती का नाम

मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक लैंड कर चुके रोवर परसिवरेंस के साथ जो एक और चीज वहां पर पहली बार गई है वो है उसका एक ड्रोन। इस ड्रोन का नाम है Ingenuity। ये नाम इसको किसी और ने नहीं बल्कि एक भारतीय मूल की युवती ने दिया है। जीहां! अमेरिका के अलबामा में पढ़ने वाली हाई स्‍कूल की छात्रा ने मार्स रोवर 2020 का नाम परसिवरेंस से पहले सुझाया था। नासा को अपने हेलीकॉप्‍टर ड्रोन के लिए ये नाम काफी सटीक लगा और इसे ये नाम दे दिया गया।

Ingenuity दरअसल नासा के वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत का ही परिणाम है। उम्‍मीद की जा रही है कि ये अंतरिक्ष और मंगल से जुड़े रहस्‍यों को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करेगा। रूपाणी ने लिख है कि इससे लोगों को अलग सोचने की आदत पड़ेगी।

आपको बता दें कि इस छोटे से दिखाई देने वाले हेलीकॉप्‍टर ड्रोन की बड़ी खूबी है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका बेहद कम वजन और इसका आकार है जो इसको कम एनर्जी में तेजी से उड़ान भरने की ताकत देता है। आपको जानकर हैरत होगी कि इसका वजन दो किग्रा से भी कम है। इस ड्रोन के चीफ पायलट हावर्ड ग्रिप का कहना है कि राइट ब्रदर्स ने वर्षों पहले जिस मशीन को बनाकर दुनिया को चौंका दिया था अब वही मशीन काफी आगे बढ़ चुकी है। वर्षों पहले जो काम राइट ब्रदर्स ने करा था अब वहीं Ingenuityकी मदद से मंगल पर किया जाएगा।

Ingenuity में कार्बन फाइबर के बने ब्‍लेड लगे हैं और जो रोटर से जुड़े हैं। ये हर एक मिनट में करीब 2400 चक्‍कर लगाते हैं। आपको जानकर हैरत होगी कि ये आसमान में मंडराते किसी बड़े हेलीकॉप्‍टर के ब्‍लेड की अपेक्षा में कहीं तेजी से घूमते हैं। इसको ऊर्जा देने के लिए इसमें सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो इसकी एक बैटरी से जुड़े हैं। इसमें साइंस के प्रयोग के लिए कोई इंस्‍ट्रूमेंट्स नहीं है। ये सब काम परसिवरेंस करेगा। लेकिन ये मंगल की सतह पर उड़ते हुए वहां की फोटो क्लिक करेगा। वहीं परसिवरेंस में लगा कैमरा भी लगातार इसको देखता रहेगा।

आपको बता दें कि मंगल ग्रह पर किसी भी चीज को उड़ाना काफी मुश्किलों भरा है। इसकी वजह है वहां का वातावरण जो धरती के मुकाबले करीब 99 फीसद कम डेंस हैं। Ingenuity हल्‍का होने की वजह से और इसके ब्‍लेड इसकी अपेक्षा कुछ बड़े होने की वजह से ये काम बखूबी कर लेते हैं।

 

इस ड्रोन की एक बड़ी खासियत और है। मंगल पर स्थित जेजीरो क्रेटर पर रात का तापमान माइन 130 डिग्री फारेनहाइट तक चला जाता है। ऐसे तापमान में हड्डियां भी जम जाएंगी। लेकिन वैज्ञानिकों ने इसको इस तरह के तापमान में काम करने लायक बनाया है। यहां के इतने कम तापमान का इस पर कोई असर नहीं होने वाला है। इसके साथ एक और मजेदारी वाली बात ये भी है कि इसको किसी जॉयस्‍टीक से ग्राउंड कंट्रोल से कंट्रोल नहीं किया जाएगा। बल्कि इसको इस तरह से बनाया गया है कि ये खुद अपने फैसले आप ले सकेगा।

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