किरण बेदी को हटाने से भाजपा को कैसे मिलेगा फायदा

पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी को हटाए जाने से राज्य की कांग्रेस सरकार की एक बड़ी मांग तो पूरी हो गई है, लेकिन उसके हाथ से विधानसभा चुनाव का एक मुद्दा भी कम हो गया है। दूसरी तरफ भाजपा ने राज्य में अपनी जमीन हासिल करने के लिए कांग्रेस में तो सेंध लगाई ही है अब किरण बेदी की जगह तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुन्दरराजन को उपराज्यपाल का प्रभार सौंप कर अपने लिए लाभ की स्थिति पैदा की है। तमिलिसाई तमिलनाडु से आती हैं और पुडुचेरी की राजनीति तमिलनाडु से प्रभावित रहती है।

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने पिछले दिनों दिल्ली आकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ज्ञापन सौंपकर किरण बेदी को हटाए जाने की मांग की थी। दरअसल किरण बेदी के उपराज्यपाल बनने के बाद से ही वहां पर राज्य सरकार और उपराज्यपाल के बीच कई मुद्दों पर टकराव रहा और बेदी लगातार विवादों में भी बनी रहीं। अब विधानसभा चुनाव के ठीक पहले और किरण बेदी का कार्यकाल पूरा होने के तीन महीने पहले उनको हटाए जाने के कई राजनीतिक निहितार्थ भी हैं।

दरअसल कांग्रेस ने राज्य में किरण बेदी को मुद्दा बनाया हुआ था और अब उनको हटाए जाने के बाद बेदी विरोध के मुद्दे की धार कमजोर पड़ गई है। बेदी के जरिए कांग्रेस परोक्ष रूप से भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधती रही है। इस बीच भाजपा ने कांग्रेस के कई नेताओं को भी तोड़ लिया है और अपनी जगह बनाने की तैयारी भी कर ली है।

तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदरराजन मूल रूप से तमिलनाडु से हैं। उनको प्रभार मिलने के भी राजनीतिक अर्थ है। अब जबकि चुनाव नजदीक आ गए हैं तब राज्यपाल ज्यादा बेहतर संवाद राज्य के लोगों से कर सकेंगी और परोक्ष रूप से इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। वैसे भी नारायणसामी सरकार अल्पमत में आ गई है और चुनाव तक वह रहेगी या नहीं यह तय होना बाकी है। अगर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने की नौबत आती है तब उपराज्यपाल की भूमिका बढ़ जाएगी।

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