कू ऐप का मालिक कौन है, क्या है इसका चाइनीज कनेक्शन?

सरकार और ट्विटर में जारी तकरार के बीच देसी माइक्रोब्लॉगिंग ऐप कू (Koo) सुर्खियों में है। पिछले 24 घंटे में Koo ऐप को 30 लाख से ज्यादा डाउनलोड्स मिले हैं। कू ऐप अभी चार भारतीय भाषाओं में  हिंदी, तमिल, तेलुगू और कन्नड़ में उपलब्ध हैं। प्ले स्टोर पर इसके एक मिलियन से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। इसे बेंगलुरु की बॉम्बिनेट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है।

बढ़ती लोकप्रियता के बीच अब यह सवाल भी उठ रहे हैं कि Koo ऐप का ओनर कौन है? और क्या इसका कोई चाइनीज कनेक्शन भी है? कू ऐप के को-फाउंडर और सीईओ अप्रमेय राधाकृष्णा हैं। उन्होंने बताया है कि Koo की पैरेंट कंपनी से चाइनीज इनवेस्टर शुनवेई कैपिटल (Shunwei Capital) पूरी तरह बाहर हो जाएगी और यह ऐप पूरी तरह से ‘आत्मनिर्भर’ होगा। राधाकृष्णा ने यह बात सीएनबीसी-टीवी 18 को दिए एक इंटरव्यू में कही है।

चाइनीज इनवेस्टर शुनवेई की सिंगल डिजिट में हिस्सेदारी
चाइनीज इनवेस्टर शुनवेई कैपिटल ने कू (Koo) और Vokal की पैरेंट कंपनी बॉम्बिनेट टेक्नोलॉजीज में 2018 में पैसा लगाया था। राधाकृष्णा ने बताया है, ‘शुनवेई ने शुरुआती ब्रांड Vokal में निवेश किया था। हमने अपने बिजनेस में Koo पर फोकस बढ़ाया है और अब शुनवेई बाहर निकलने वाली है। हम ट्रूली आत्मनिर्भर भारत ऐप हैं।’ कू के सीईओ ने ट्विटर पर जानकारी दी है कि शुनवेई की कंपनी में हिस्सेदारी सिंगल डिजिट में है।

Tracxn के मुताबिक, 31 मार्च 2019 को कंपनी में शुनवेई कैपिटल की हिस्सेदारी 11.1 फीसदी थी। कंपनी ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी कि उसने एक्सेल, कलारी कैपिटल, ब्लूम वेंचर्स और 3one4 कैपिटल से 41 लाख डॉलर का फंड जुटाया है। Koo ने पिछले साल अगस्त में भारत सरकार की तरफ से आयोजित आत्मनिर्भर ऐप इनोवेशन चैलेंज को जीता था।

रिसर्चर का दावा, यूजर्स की पर्सनल इंफॉर्मेशन लीक कर रहा ऐप
एक फ्रेंच सिक्योरिटी रिसर्चर ने दावा किया है कि Koo ऐप इस्तेमाल के लिए बहुत सेफ नहीं है। रिसर्चर ने कहा है कि यह ऐप यूजर्स की ई-मेल आईडी, फोन नंबर और डेट ऑफ बर्थ (जन्मतिथि) जैसी सेंसिटिव इंफॉर्मेशन लीक कर रहा है। फ्रेंच सिक्योरिटी रिसर्चर का नाम रॉबर्ट बैपटिस्ट है और अपने ट्विटर अकाउंट के कारण वह एलियट एंडरसन के नाम से फेमस हैं।

बैपटिस्ट ने ट्वीट किया है, ‘आपके कहने पर मैंने यह किया है। मैंने इस नए Koo ऐप को 30 मिनट इस्तेमाल किया। यह ऐप यूजर की ईमेल, जन्मतिथि, नाम, मैरिटल स्टेटस, जेंडर जैसे पर्सनल डेटा को लीक कर रहा है।’ एंडरसन ने ट्वीट के साथ स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए हैं। एंडरसन ने इससे पहले आधार सिस्टम की खामियों को उजागर किया था।

भारतीय भाषाओं में भारत की आवाज’
कू ऐप ऐंड्रॉयड और iOS दोनों प्लैटफॉर्म पर उपलब्ध है। साथ ही, इसका वेबपेज भी है। कू (Koo) पिछले दिनों उस समय सुर्खियों में आया जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यह माइक्रोब्लॉगिंग प्लैटफॉर्म ज्वाइन करने के बारे में ट्वीट किया। गोयल के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मिनिस्टर रवि शंकर प्रसाद, कर्नाटक के चीफ मिनिस्टर बी एस येदियुरप्पा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, क्रिकेटर अनिल कुंबले, जवागल श्रीनाथ, ईशा फाउंडेशन के जग्गी वासुदेव समेत कई दिग्गज Koo का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा, कई सरकारी मिनिस्ट्रीज और डिपार्टमेंट ने भी कू ज्वाइन किया है। कंपनी का कहना है कि यह ऐप ‘भारतीय भाषाओं में भारत की आवाज’ है। कू ऐप को ट्विटर का इंडियन वर्जन बताया जा रहा है।

Koo में कैरेक्टर लिमिट 400 शब्द की है। कोई भी व्यक्ति अपना मोबाइल नंबर इस्तेमाल करते हुए कू में साइन-अप कर सकता है। कू के फीचर ट्विटर से काफी मिलते-जुलते हैं। यह यूजर्स को लोगों को फॉलो करने की सहूलियत देता है। यूजर्स टेक्स्ट में मेसेज लिख सकते हैं या उसे ऑडियो या फिर विडियो फॉर्मेट में शेयर कर सकते हैं।

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