विष्णु जी ने देवर्षि को बताया था मानव जाति के उद्धार का मार्ग

खरमास भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। कष्टों और संकटो से मुक्ति पाने के लिए से विष्णु जी ने मनुष्य के कर्मो को ही महत्ता दी गई है। विष्णु जी के अनुसार व्यक्ति के कर्म ही उसके भविष्य का निर्धारण करते हैं।

खरमास आज से शुरू हो रहा है। यह मास भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। कष्टों और संकटो से मुक्ति पाने के लिए से विष्णु जी ने मनुष्य के कर्मो को ही महत्ता दी गई है। विष्णु जी के अनुसार, व्यक्ति के कर्म ही उसके भविष्य का निर्धारण करते हैं। अगर कोई व्यक्ति अपने भाग्य के भरोसे बैठा रहे तो उसका उद्धार होना संभव नहीं होता है। इसी को लेकर एक पौराणिक कथा शास्त्रों में वर्णित है। तो आइए पढ़ते हैं यह कथा।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवर्षि नारद जी बैकुंठ धाम गए। वहां नारद जी ने श्रीहरि से कहा कि पृथअवी पर आपका प्रभाव कम हो रहा है। जो लोग धर्म पर चल रहे हैं उन्हें अच्छा फल प्राप्त नहीं हो रहा है। वहीं जो लोग पाप कर रहे हैं उनका भला हो रहा है। तब श्री विष्णु ने कहा, ‘‘देवर्षि, ऐसा नहीं है। यह सब नियति के हिसाब से ही हो रहा है। और यही उचित है।’’

तब नारद जी ने कहा, ‘‘मैंने स्वयं अपनी आंखो से देखा है प्रभु। पपियों को अच्छा फल प्राप्त हो रहा है। वहीं, धर्म के रास्ते पर चलने वालों को बुरा फल प्राप्त हो रहा है।’’ तब श्री हरि ने देवर्षि से कहा कि वो किसी ऐसी घटना का उल्लेख करे।

नारद जी ने कहा कि जब वो एक जंगल से गुजर रहे थे तब एक गाय दलदल में फंसी हुई थी। कोई भी व्यक्ति उसे बचाने नहीं आ रहा था। हर कोई उसे कोई उसे लांघकर निकल जा रहा था। एक चोर ने भी ऐसा ही किया। वह गाय को लांघकर आगे निकल गया और आगे जाकर चोर को सोने की मोहरों से भरी एक थैली मिली।

फिर कुछ देर बाद एक बूढ़ा साधु वहां से गुजरा। उसने उस गाय को बचाने की पूरी कोशिश की। पूरी जान लगाकर उसने उस गाय को बचा लिया। लेकिन गाय को बचाने के बाद जब वो आगे गया तो एक गड्ढे में गिर गया। तब देवर्षि ने कहा कि प्रभु! यह कौन सा न्याय है, बताइए?

श्री हरि ने कहा कि जो चोर गाय को लांघकर भाग गया था उसकी किस्मत में खजाना था। लेकिन इस पाप के चलते उसे कुछ मोहरें ही मिलीं। लेकिन उस साधु के भाग्य में मृत्यु थी। लेकिन गाय को बचाने के चलते उसकी मृत्यु एक छोटी-सी चोट में बदल गई। इसलिए वो गड्ढे में जा गिरा और मृत्यु से बच गया।

ऐसे में इंसान का भाग्य उसके कर्मों से ही तय होता है। सत्कर्मों का प्रभाव व्यक्ति के हर दुख को खत्म कर देता है। वहीं, गलत कर्म व्यक्ति को बुरा प्रभाव देते हैं। विष्णु जी की बात से नारद जी को मानव जाति के उद्धार का मार्ग पता लग गया।

डिसक्लेमर : ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। ‘  

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