जम्मू- कश्मीर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से परिसीमन को लेकर गठित आयोग की पहली बैठक गुरुवार को दिल्ली में हुई। हालांकि यह बैठक शुरू होने से पहले ही राजनीति की भेंट चढ़ गई। आयोग में नामित पांच राजनीतिक सदस्यों में से सिर्फ दो सदस्य ही बैठक के लिए पहुंचे। बावजूद इसके बैठक में परिसीमन से जुड़े सभी अहम मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा हुई। साथ ही नए परिसीमन में भौगोलिक और प्रशासनिक आधार के साथ आम लोगों की सुविधाओं को भी ध्यान में रखने का सुझाव दिया गया।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में हुई इस बैठक को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। क्योंकि इस काम के पूरा होते ही विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से परिसीमन को लेकर इस आयोग का गठन हाल ही में किया है। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर की राजनीति से जुड़े पांच सदस्यों को भी बतौर सदस्य नामित किया गया है। इनमें फारूक अब्दुल्ला, मोहम्मद अकबर लोन, हसनैन मसूदी, जुगल किशोर शर्मा और डॉक्टर जितेंद्र सिंह शामिल हैं। गुरुवार को आयोग की पहली बैठक में इन पांच राजनीतिक सदस्यों में सिर्फ जुगल किशोर शर्मा और डॉक्टर जितेंद्र सिंह शामिल थे।

आयोग के सदस्य और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बैठक में शामिल न होने वाले राजनीतिक सदस्यों पर तीखा हमला बोला और कहा कि ये वही लोग हैं, जो संसद में खड़े होकर विधानसभा चुनाव की मांग करते हैं, लेकिन जब उस दिशा में सकारात्मक तरीके से काम किया जा रहा है तो सहयोग करने से इन्कार करते हैं। उन्होंने कहा कि वैसे भी यह एक संवैधानिक आयोग है, इसका विरोध करना अपने आप में असंवैधानिक है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और आयोग के नामित सदस्य फारूक अब्दुल्ला ने बैठक में शामिल न होने का पहले ही एलान कर दिया था।

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