NFS श्रेणी वालों के पास ‘दिमाग’ और ‘प्रतिभा’ भले न हो, ताली बजाने का जोर जरूर है

NFS–कहीं आप इसे IFS जैसा मत समझ लीजियेगा! यह भारतीय विदेश सेवा या भारतीय वन सेवा जैसी कोई राष्ट्रीय सेवा नहीं है. यह Not Found Suitable का संक्षिप्त रूप है. आजकल तीन शब्दों वाला यह ‘शब्द-समूह’ भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों, खासकर हिन्दी भाषी राज्यों के संस्थानों में बहुत लोकप्रिय है. इसका मतलब है कि नियुक्ति की प्रक्रिया में ‘योग्य नहीं पाये गये.’

पिछडे वर्ग (OBC) की पृष्ठभूमि से आने वाले अभ्यर्थियों के मामले में NFS का अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है. अनारक्षित (Unreserved) यहां तक कि हाल के वर्षो में सृजित एक नयी श्रेणी: EWS के मामले में NFS का टैग शायद ही कभी लगता है!

प्रोफेसर, निदेशक या वाइस चांसलर की नियुक्ति होती तो NFS टैग का कुछ मतलब समझने लायक होता! पर असिस्टेंट प्रोफ़ेसर जैसे अपेक्षाकृत जूनियर पद की नियुक्ति में इसके प्रयोग का मतलब कोई कैसे समझे! इस पद के लिए उम्मीदवारों/अभ्यर्थियों की बेशुमार संख्या लाइन में होती है. उनमें कोई भी योग्य न मिले; ऐसा सिर्फ अपनी इस पावन-पुण्य भूमि, खासतौर पर हिन्दी भाषी राज्यों में ही संभव है! और फिर हाल का प्रकरण तो अपने अति-पवित्र प्रयागराज का है.

ऐसा लगता है, NFS भी ‘आरक्षित’ हो गया है–सिर्फ पिछड़े वर्गो (OBC) या आदिवासियों (ST) के मामले में! पिछले दिनों हमने किसी नियुक्ति प्रक्रिया में ST के संदर्भ में भी NFS का प्रयोग देखा था.

पिछडे वर्गो (OBC) के मामले में NFS का ताजातरीन टैग देखना हो तो अपने उत्तर प्रदेश में आइये. पंतजी के नाम पर अपने इलाहाबाद में स्थापित इस महत्वपूर्ण समाज अध्ययन संस्थान में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया में सभी वर्गो से योग्य और योग्यतम लोग मिल गये पर पिछड़े वर्ग (OBC) से एक न मिला! OBC से सभी ‘अयोग्य लोग’ ही इंटरव्यू बोर्ड तक पहुचे थे.

केंद्र से लेकर राज्य तक, राजनैतिक और शैक्षणिक सत्ता के शीर्ष पर बैठे हे ‘महामहिम-गणों’ आपकी महिमा अपरंपार है! खासतौर पर राजनीतिक-सत्ता पर आसीन महामहिमो, आप सचमुच कितने उस्ताद हैं! जिन्हें आपकी सत्ताएं और संस्थाएं ‘अयोग्य’ बताती रहती हैं, उन सामाजिक समूहों की आबादी का बड़ा हिस्सा आपको ‘योग्यतम’ मानते हुए अपने वोट से आपको सत्ता-शीर्ष पर बैठाता आ रहा है. आप उन पिछड़ों (OBCs) को ‘हिन्दुत्व’ का शर्बत पिला-पिला कर अपनी योग्यता से चमत्कृत कर देते है!

आप अद्भुत हैं, अनोखे हैं, अद्वितीय हैं! आपकी ‘जय-जय कार’ यूँ ही नहीं होती है! NFS श्रेणी वालों के पास ‘दिमाग’ और ‘प्रतिभा’ भले न हो, ताली बजाने का जोर जरूर है. तालियाँ बजवाइये, खूब बजवाइये पर याद रखिये, जिस दिन इन युवाओं के बीच से कोई नया ईमानदार और समझदार नेतृत्व उभरेगा, आपका सारा मायाजाल, छल-प्रपंच, सबकुछ  छिन्न-भिन्न हो जायेगा!
<span;>उर्मिलेश

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