कोरोना की बेकाबू रफ्तार, महाराष्ट्र में लॉकडाउन के अलावा नहीं बचा कोई और रास्ता?

महाराष्ट्र में कोरोना कोरोना ने त्राही त्राही मचा रखी है। कोरोना से निपटने के सारे उपाय नाकाम मालूम पड़ रहे हैं। कड़ी पाबंदियों के बादी भी कोरोना मामलों में कमी आती नहीं दिखाई दे रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अब राज्य में सख्त लॉकडाउन लगाने के संकेत दिए हैं। शिवसेना के मुखपत्र में छपे संपादकीय से साफ संकेत मिल रहे हैं कि महाराष्ट्र में लॉकडाउन लगाया जा सकता है। मुखपत्र में लिखा है कि कोरोना से निपटने के लिए राज्य में लॉकडाउन लगाना ही पड़ेगा।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कहना है कि अगर कोरोना वायरस को हराना है तो लॉकडाउन और कड़ी पाबंदियां लगानी ही पड़ेंगी। शिवसेना का मुखपत्र सामना लिखता है, “महाराष्ट्र में सख्त लॉकडाउन लगाना ही पड़ेगा, ऐसा संकेत मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिया है। विपक्ष को लॉकडाउन के कारण लोगों का अर्थचक्र बिगड़ जाएगा ऐसा डर लगना स्वाभाविक है, परंतु फिलहाल लोगों का जान गंवाने का जो ‘अनर्थचक्र’ जारी है, उसे रोकना है तो सख्त लॉकडाउन और पाबंदियां अपरिहार्य है, ऐसा मुख्यमंत्री का कहना है।”

लॉकडाउन पर विपक्ष की मनाही 

विपक्ष का मत सरकार से एकदम उलट है। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि लॉकडाउन बिल्कुल नहीं लगाया जाना चाहिए। अगर लॉकडाउन लगाया जाता है तो लोगों में आक्रोश भड़क उठेगा। लेकिन वहीं अगर कोरोना वायरस के कहर को रोकना है तो महाराष्ट्र सरकार को लॉकडाउन के अलावा दूसरा कोई रास्ता दिखाई नहीं पड़ता है। सामना में लिखा है, “लॉकडाउन बिल्कुल नहीं, ऐसा हुआ तो लोगों का आक्रोश भड़क उठेगा। फडणवीस के इस दावे में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है, ऐसा नहीं है। लेकिन कोरोना संक्रमण की शृंखला को तोड़ना है तो लॉकडाउन के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। अब इसके अलावा अन्य कोई विकल्प होगा तो श्री फडणवीस बताएं।”

राज्य में हालात बेकाबू

पहले से लगाई गईं पाबंदियों से कोई असर पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है। राज्य में कोरोना बेकाबू होता जा रहा है। महाराष्ट्र में आईसीयू, वेंटिलेटर, बेड की कमी हो रही है। सरकारी व प्राईवेट असप्तालों में केवल 117 बेड बचे हैं। ये चिंता का विषय है. रेमडेसिवी दवा की भी कमी है। कई जगहों पर इसकी कालाबाजारी चल रही है। मरीज ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं। ये महाराष्ट्र की एक ऐसी तस्वीर है जो कोरोना के आगे बेबस दिखाई दे रहा है।

लगातार केंद्र पर मदद के लिए भेदभाव का आरोप लगाती महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार उसके साथ सौतेला बर्ताव कर रही है। पृथ्वीराज चौहान ने स्पष्ट कहा है कि महाराष्ट्र को पीपीई किट,  मास्क और वेंटिलेटर जैसे महत्वूपर्ण चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध कराने में भी सौतेला बर्ताव किया गया।

मजदूरों, छोटी दुकानदारों का रखा जाएगा खास ध्यान

शिव सेनाे के मुख्य पत्र हिंदी सामना में लॉकडाउन के बारे लिखा गया है कि “कोरोना की पाबंदी लगाते समय जो मेहनतकश हैं, उनकी जरूरतों का ध्यान रखना ही होगा। रोजगार बंद होगा, बड़ा वर्ग एक बार फिर नौकरी गंवाएगा। छोटे दुकानदार, फेरीवालों की जीवन गाड़ी रुक जाएगी और उससे विद्रोह, असंतोष की चिंगारी भड़केगी। श्री फडणवीस जो चिंता व्यक्त करते हैं, उसके अनुसार आक्रोश वगैरह होगा, ऐसा नहीं लगता। लोगों को समझाने का काम जैसे सरकारी पक्ष का है, उसी तरह विपक्ष का भी है।”

“लॉकडाउन के कारण बुरी तरह प्रभावित होनेवाले गरीबों को गुजारे के लिए आर्थिक मदद दी जाए और ऐसे जरूरतमंदों के खाते में सीधे रकम जमा की जाए, यह सुझाव अच्छा है और इस कार्य के लिए केंद्र सरकार को महाराष्ट्र सरकार को खुले हाथों से मदद करनी होगी।”

रविवार शाम महाराष्ट्र में कोरोना के 63 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। राज्य में कोरोना संक्रमण के 63,294 नए केस सामने आए हैं, जबकि 349 लोगों की मौत हुई है। महाराष्ट्र में एक दिन में सामने आए कोरोना केसों का यह रिकॉर्ड है। राज्य में फिलहाल कोरोना के 5,65,587 एक्टिव केस हैं। अब तक प्रदेश में कोरोना से 57,987 लोगों की मौत हो चुकी है।

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