उसने डॉ. बिधान चंद्र रॉय, ज्योति बसु से लेकर ममता बनर्जी तक को अपने यहां से सरकार चलाते देखा है। वह तत्कालीन युवा कांग्रेस नेत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में उसका घेराव करने आ रहे 13 पार्टी कार्यकर्ताओं की पुलिस फायरिंग में दर्दनाक मौत की भी गवाह रही है। दुष्कर्म की शिकार हुई एक मूक-बधिर लड़की को इंसाफ दिलाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु के कक्ष के सामने प्रदर्शन कर रहीं ममता के केश पकड़कर पुलिसकर्मियों द्वारा उन्हें कोलकाता पुलिस मुख्यालय ले जाकर लॉकअप में बंद कर देने की घटना उसके सामने ही हुई थी और उसके 18 साल बाद उसी ममता को मुख्यमंत्री बनकर उसके यहां आते भी उसने देखा था। वह कोई और नहीं, दशकों सूबे की सत्ता का पावरहाउस रही राइटर्स बिल्डिंग है, जो आज चुनावी शोर के बीच खामोश है। उसकी हालत परित्यक्त भवन जैसी हो गई है।

2013 में राज्य सचिवालय को राइटर्स से नबान्न ले गई थीं ममता

2011 में बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के बाद ममता ने पहले दो साल राइटर्स से ही सरकार चलाई, फिर 2013 में राइटर्स की मरम्मत का हवाला देकर राज्य सचिवालय को नबान्न में ले गई। इसका वामदलों ने जबर्दस्त विरोध किया था। तब से अब तक राइटर्स की मरम्मत का काम जारी है, हालांकि अंदरखाने खबर है कि काफी समय से मरम्मत का काम बंद है।

राइटर्स ने खोया रुतबा

राज्य सचिवालय के एक कर्मचारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कहा-‘एक समय राइटर्स का क्या रूतबा हुआ करता था। वहां दिनभर चहल-पहल रहती थी। मुख्यमंत्री, मंत्रियों से लेकर वीवीआइपी तक का दिनभर आना-जाना लगा रहता था। चुनाव के समय गहमागहमी और बढ़ जाती थी। वहां काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों में भी नई सरकार को लेकर उत्सुकता, आशंका, जिज्ञासा व उम्मीदें रहती थीं। जब से राज्य सचिवालय को नदी पार हावड़ा के नबान्न ले जाया गया है, तब से राइटर्स बिल्डिंग परित्यक्त सी हो गई है। एक जमाने में राइटर्स से बंगाल सरकार के 34 विभाग चलते थे और करीब 6,000 अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत थे। आज वहां वीरानी छाई रहती है।

सत्ता में आने पर राइटर्स को फिर से बनाएंगे राज्य सचिवालय : भाजपा

इस बीच भाजपा ने कहा है कि बंगाल की सत्ता पर आने पर वह राइटर्स को फिर से राज्य सचिवालय बनाएगी। बंगाल भाजपा के प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने कहा-‘राइटर्स से बंगाल की जनता का खास जुड़ाव है। उससे लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं और उसका अपना अलग ऐतिहासिक महत्व है।’

ममता को पसंद नहीं है ‘लाल बाड़ी’

कुछ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता को दरअसल ‘लाल बाड़ी’ के नाम से मशहूर राइटर्स पसंद ही नहीं है इसलिए उन्होंने राज्य सचिवालय को वहां से हटा दिया और इतने वर्षों बाद भी वहां लौटने को लेकर कोई आग्रह नहीं दिखाया, वरना आठ वर्षों का समय बड़े से बड़े भवन की मरम्मत के लिए कम नही होता।

ममता ने ली थी सत्ता में आने पर ही राइटर्स में कदम रखने की प्रतिज्ञा

ममता ने राइटर्स में अपने साथ हुई बदसलूकी के बाद प्रतिज्ञा ली थी कि वे अब दोबारा राइटर्स में तभी कदम रखेंगी, जब उनकी पार्टी बंगाल में सत्ता में आएगी। ममता उस वक्त कांग्रेस में थी। बाद में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस बनाई, जिसने 2011 के विधानसभा चुनाव में जबर्दस्त बहुमत हासिल किया। 20 मई को राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ममता उस दिन पैदल चलकर राइटर्स पहुंची थीं।

राइटर्स का है 241 साल पुराना इतिहास

राइटर्स का 241 साल पुराना इतिहास है। इसका निर्माण सन् 1777 में शुरू हुआ था और इसे 1780 में खोला गया। इसका डिजाइन थॉमस लियोन ने तैयार किया था। यह ब्रिटिश राज में राइटर्स (जूनियर क्लर्क) का प्रधान प्रशासनिक कार्यालय हुआ करता था। विरासती यह इमारत 5,50,000 वर्ग फुट जगह पर विस्तृत है।