एक ताने ने बदल दी जिंदगी की राह, पानीपत की Yoga Girl ने जुनून से बनाया नया मुकाम

कभी-कभी काेई ताना इतना चुभ जाता है कि खुद को साबित करने का जुनून जिंदगी की राह ही बदल देता है। पानीपत के एल्डिको की रहने वाली अंजली राय के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक ताने ने अंजली के जिंदगी की राह और मकसद को बदल दिया। कभी योग से दूर रहने वाली फिजियोथेरेपी की विद्यार्थी अंजली आज ‘योग गर्ल’ (Yoga Girl) के नाम से मशहूर हैं। वह राष्‍ट्रीय व अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर कई पदक जीत चुकी हैं। वह अब तक करीब 20 हजार लोगों को योग सिखा चुकी हैं।

फिजियोथेरेपी की पढ़ाई छोड़ योग में स्टार बनी, राष्‍ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर जीत चुकी है कई पदक

योग गर्ल अंजली राय की एक योग भंगिमा। (फोटो अंजली राय द्वारा उपलब्‍ध कराई।)

दरअसल, आज से पांच साल पहले कुरुक्षेत्र में आयोजित योग प्रतियोगिता में अंजली को निर्णायक मंडल में शामिल एक प्रशिक्षक ने सबके सामने ताना दे दिया। प्रशिक्षक ने कहा था ‘ये योग करने लायक नहीं है’। अंजली काे यह बात इतनी चुभ गई कि खुद को साबित करने के लिए जिंदगी की राह ही बदल ली। इतना ही योग के लिए उन्‍होंने फिजियोथेरेपी के कोर्स की पढ़ाई तक अधर में छोड़ दी। आज वह महाराष्ट्र से योग दर्शन में एमए कर रही हैं। उनका लक्ष्य योग में पीएचडी कर योग स्कूल खोलना है। वह बच्चों में शुरुआत से ही योग के प्रति रुचि पैदा करना चाहती हैं।

किताबों में पढ़ व देखकर सीखे योग के गुर

अंजली बताती हैं कि वह बारहवीं में पानीपत के आर्य गर्ल्‍स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ रही थीं। उस समय योग को लेकर न कोई अभ्यास था और न कोई जानकारी। इसके बावजूद साथी छात्राओं के साथ कुरुक्षेत्र में आयोजित योग प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए चली गईं। वहां एक प्रशिक्षक ने उन पर कटाक्ष कर दिया। वहीं से मन में ठान लिया कि योग में खुद को साबित करके दिखाना है।

वह कहती हैं, ‘कुरुक्षेत्र की योग प्रतियोगिता से लौटकर घर आते ही पापा से योग क्रियाओं से संबंधित किताबें मंगवाईं। किताबों में ही देख व पढ़ कर सुबह-शाम योग का अभ्यास शुरू किया और पहली ही बार में राष्‍ट्रीय स्तर की योग प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल किया।’

अब तक करीब 20 हजार लोगों को सिखा चुकी हैं योग

योग गर्ल (Yoga Girl) अंजली अब तक योग में राष्‍ट्रीय से लेकर अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर अनेक पदक जीत चुकी हैं। उन्‍होंने बताया कि वह करीब 20 हजार लोग को योग सिखा चुकी हैं। उन्‍होंने आयुष मंत्रालय की तरफ से  अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस को लेकर लगने वाले कैंपों में भी करीब 14 हजार लोगों को योग सिखाया। इसके साथ ही वह आइपीएस व आइएएस को भी योग की ट्रेनिंग दे चुकी हैं।

योगासन करतीं अंजली राय। (फोटो अंजली राय ने उपलब्‍ध कराई।)

योग ने दी नई पहचान और सम्‍मान

अंजली कहती हैं , ‘योग ने मुझे ऐसी पहचान दी है, जिस बारे में कभी सोचा तक नहीं था। यही कारण है कि आज मुझे ‘अंजली योग वाली’ और योग गर्ल (Yoga Girl) के नाम से जाना जाता है।’  वह बताती हैं कि फिजियोथेरेपी की पढ़ाई के दौरान बंगलूर में लोग उन्‍हें ‘अंजली हरियाणा योग वाली’ कहकर ही पुकारते थे। योग से न केवल हम अपने शरीर को निरोग रख सकते हैं, बल्कि इससे अपने भविष्य को भी बेहतर बना सकते हैं।

योग बगैर नहीं लगता था मन

अंजली ने बताया कि बारहवीं कक्षा के बाद उन्‍होंने फिजियोथेरेपी की पढ़ाई के लिए बंगलूर में दाखिला लिया। वह पढ़ाई करतीं, लेकिन ध्यान योग में रहता था। उन्‍हें पूरा दिन पढ़ाई करके वह खुशी नहीं मिलती, जो योग करने से मिलती थी। इसलिए तीन साल पढ़ाई करके कोर्स को अधर में ही छोड़ योग में खुद को साबित करने के लिए मेहनत शुरू कर दी। अगर पढ़ाई पूरी भी करती तो भी योग में ही आती। योग में उनको खुद को साबित ही नहीं करना था, बल्कि यह उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका था।

योगासन करतीं पानीपत की अंजलि राय। (फोटो अंजली राय ने उपलब्‍ध कराई)

अंजली की योग में उपलब्धियां

  • – चीन के शेन्जेन में 2018-2019 में स्वर्ण पदक जीता।
  • – अंतरराष्ट्रीय योग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक और 2018-19 में चैंपियन ऑफ चैंपियन विजेता।
  • – भारतीय योग व विश्व योगा फेडरेशन की ओर से 2017 में आयोजित तीसरी इंटरनेशनल योग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
  • – विश्व योग फेडरेशन की ओर से 2019 में आयोजित विश्व योग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल।
  • -पर्यटन मंत्रालय पांडुचेरी द्वारा आयोजित इंटरनेशनल योग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।

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