नियोजन नीति से जुड़ीं बहालियां रद, सरकारी नौकरियों पर खतरा

राज्य कैबिनेट ने नियोजन नीति के तहत जिलास्तरीय पदों पर दस वर्ष के लिए स्थानीय लोगों को आरक्षण का प्रावधान करनेवाले संकल्प को वापस ले लिया है। हाईकोर्ट ने पहले ही इसे रद करने को कहा था। अब अधिसूचित और गैर अधसिसूचित जिलों के लिए जारी दोनों संकल्पों को वापस लेने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि प्रक्रियाधीन तमाम नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से रोक दी जाएंगी और नए सिरे से विज्ञापन निकालकर नियाेजन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जिन लोगों को अभी तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है उनकी नियुक्ति को अपूर्ण मानते हुए इससे संबंधित विज्ञपनों को निरस्त कर दिया गया है। इससे पंचायत सचिवों का मामला तो फंस ही गया है, शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य कई जिला और राज्य स्तरीय नियुक्तियां अवरुद्ध हो गई हैं। जिनकी नियुक्ति हो गई है उनका मामला कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा और फिलहाल जो जहां हैं वहीं काम करते रहेंगे।

राज्य कैबिनेट ने बुधवार को नियोजन नीति के संकल्‍प वापस लेने के इस प्रस्ताव के साथ ही 45 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इन प्रस्तावों में बजट सत्र के लिए तिथियों का निर्धारण भी है। 26 फरवरी से बजट सत्र शुरू होगा और 3 मार्च को राज्य का बजट पेश किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश में जनजातीय परामर्शदातृ समिति के लिए नियमावली को भी स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

बीस सदस्यीय कमेटी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे जबकि कल्याण मंत्री इसके उपाध्यक्ष होंगे। इसके अलावा 15 अनुसूचित जनजाति वर्ग के विधायकों को सदस्य के तौर पर मनोनीत किया जाएगा और इसी बिरादरी के तीन अन्य सदस्य भी मनोनीत होंगे। सभी मनोनयन मुख्यमंत्री की अनुमति से होगा। राज्य सरकार ने लॉकडाउन के दौरान नियमों को तोड़कर आनेवाले श्रमिकों पर से मुकदमा वापस लेने का निर्णय लिया है।

इसके अलावा पूर्व मुख्य सचिव डीके तिवारी को राज्य का निर्वाचन आयुक्त बनाया गया है। कैबिनेट ने धनबाद सदर अस्पताल में चिकित्सक, विशेषज्ञ चिकित्सक एवं दंत चिकित्सकों के 24 पदों का सृजन करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। दूसरी ओर रांची में बिरसा मुंडा हवाई अड्डा के विस्तारीकरण के लिए 303.62 एकड़ भूखंड देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इसमें 27.34 एकड़ भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकार को दी जाएगी और 271.28 एकड़ भूखंड लीज पर दिया जाएगा।

कोरोना संक्रमण काल में श्रमिकों पर दर्ज़ 30 मामले होंगे वापस

कोरोना काल में जारी लॉकडाउन प्रावधानों के उल्लंघन के तहत दर्ज प्राथमिकी को वापस लेने की स्वीकृति मंत्रिपरिषद की बैठक में दी गई है। पूरे राज्य में प्रवासी मजदूरों द्वारा लॉकडाउन उल्लंघन की कुल 30 प्राथमिकी दर्ज की गई है। जिसमें 204 मजदूरों को आरोपी बनाया गया है। इसमें रांची के सिल्ली थाना में 32 मजदूरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है। वही, लोहरदगा के विभिन्न थानों में 15, सिमडेगा में दो, जमशेदपुर में एक, चाईबासा में 5, दुमका में एक, साहिबगंज में 4 और पाकुड़ जिले में एक प्राथमिकी थाने में दर्ज है।

ज्ञात हो कि शुरू से ही राज्य सरकार ने श्रमिकों की चिंता की और श्रमिकों के लिए 24 घंटे संचालित कोविड-19 माइग्रेंट वर्कर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई। वेब पोर्टल लांच हुआ। पोर्टल में 7.50 लाख श्रमिकों ने निबंधन कराया। आठ लाख श्रमिक, श्रमिक स्पेशल ट्रेन से लाये गए। 484 श्रमिक लेह-लद्दाख और अंडमान द्वीप समूह से एयरलिफ्ट हुए। 600 बस पड़ोसी राज्य में श्रमिकों को लाने के लिए भेजा गया।

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