अमित शाह और रूपानी गूट की गुजरात में सफाई कर रहे है नए अध्यक्ष चंद्रकांत

भाजपा अध्यक्ष सी आर पाटिल ने पत्थर पर लिखा है कि बीजेपी 60 साल के युवाओं को टिकट नहीं देगी। यदि 3 बार चुने गए, तो उन्हें घर पर रखा जाएगा। गुजरात भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों को टिकट देने के लिए नियमों की घोषणा की है। इसके पीछे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी है। जो अमित शाह और मुख्य मंत्री विजय रूपानी का जूथ को खतम कर रहै है। अमित शाह पिछले 15 सालों से पार्टी में अपने गूट को अच्छी जगहो पर नियुक्ति कर रहे थे। अब सबकुछ खतम किया जा रहा है।

6 निगमों, 81 नगर पालिकाओं, 231 तालुका पंचायतों और 31 जिला पंचायतों के 50 प्रतिशत सदस्यों को टिकट नहीं मिलेगा।

47000 मतदान केंद्र हैं। 7600 सीटें हैं। उनमें से ज्यादातर अमित शाह के समूह से हैं। 2010 में जिस तरह आनंदीबेन पटेल ने अमित शाह के गुट का साथ दिया, उसी तरह अमित शाह ने 10 साल में आनंदीबेन समूह का सफाया कर दिया।

10 से 20 साल तक अमित शाह के समर्थक रहे सैकड़ों लोगों के सिर कलम किए जा रहे हैं।

यहां तक ​​कि अमित शाह को यह भी पता नहीं था कि सीआर पाटिल को पार्टी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जा रहा है।  न ही गुजरात भाजपा के अन्य नेता को पता था। प्रदेश नेताओं और पत्रकारों को दिल्ली से एक साथ सूचित किया गया था की पाटील नया अध्यक्ष है। तब से, गृह मंत्री अमित शाह और गृह विभाग के प्रभारी मुख्यमंत्री विजय रूपानी के समूह को काटना शुरू कर दिया था।

चंद्रकांत पाटिल के लिए, नीति उनकी नीति नहीं है। उनकी नीति दिल्ली से तय होती है। बड़ों को काटने की नीति केवल दिल्ली से दिया गया एक निर्देश हो सकता है। पाटिल में दो अन्य गृह मंत्रियों को खतम करने का साहस नहीं है। वे सूरत के लिए राजनीति करते रहे हैं। लेकिन अब राज्य की राजनीति दिल्ली से खेली जा रही है।

अमित शाह और विजय रुपाणी, जो नए बने संगठन में काट दिये गये है। अब यह निर्वाचित नेताओं के बीच भी हो रहा है।

अमित शाह के स्थानीय कार्यकर्ताओं को भाजपा के संगठन से निकालने के बाद अब स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं। दी जाने वाले टिकटों में रुपाणी या अमति शाह के समूह को मिटा दिया जाएगा। शाह और रूपानी की नींव हिल गई है। एक बार फिर आनंदीबेन मजबूत हो रही हैं।

जो टिकट दिया जाएगा, उसमें रूपानी या अमत शाह की परछाई नहीं होगी।

यह सब दिल्ली से हो रहा है। नरेंद्र मोदी कहते हैं, इतना पानी पाटील पी रहे हैं। ट्रम्प के आने और दिल्ली में दंगे भड़कने के बाद से अमित शाह का पतन शुरू हो गया है। अमित शाह और मोदी की तस्वीर एक साल से एक साल से नहीं देखी गई है।

जिस तरह से रूपानी गुजरात में एक असफल मुख्यमंत्री हैं, अमित शाह केंद्र में विफल साबित हो रहे हैं। मोदी और अमित शाह के बीच की खाई और चौड़ी हो गई है। उनकी तस्वीर गुजरात में दिखाई देती है। पाटिल केवल सूरत के नेता थे लेकिन अब वे अमित शाह के नेता हैं। इसलिए उन्होंने सौराष्ट्र में जाकर घोषणा की कि भाजपा में गुटबाजी नहीं चलेगी। राजकोट जाकर, उन्होंने रूपानी के समूह को गाल पर थप्पड़ मार दिया। इसकी गूँज अब संगठन और स्थानीय चुनावों में सुनाई देती है

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

Please Share This News By Pressing Whatsapp Button



जवाब जरूर दे 

आप अपने सहर के वर्तमान बिधायक के कार्यों से कितना संतुष्ट है ?

View Results

Loading ... Loading ...


Related Articles

Close
Website Design By Bootalpha.com +91 82529 92275
.