निर्णय:72 वर्षों से चल रही परंपरा टूटी इस वर्ष नहीं होगा रावण दहन, पंजाबी-हिंदू बिरादरी की बैठक में निर्णय लिया

राज्य सरकार की गाइडलाइन को देखते हुए रावण दहन को लेकर पंजाबी-हिंदू बिरादरी की बैठक मंगलवार को लाला लाजपत राय पथ स्थित पंजाबी भवन में हुई। निर्णय हुआ कि इस वर्ष मोरहाबादी में रावण दहन नहीं होगा। प्रवक्ता अरुण चावला ने बताया कि देश के विभाजन के समय पाकिस्तान से आकर खिजुरिया तालाब गोस्सनर कॉलेज कैंपस के रिफ्यूजी कैंप में रह रहे 12-15 पंजाबी परिवारों ने विजयादशमी के दिन रावण दहन कर पहला दशहरा मनाया था। इस वर्ष 72 वर्षों बाद रावण दहन नहीं होगा।

प्रवक्ता अरुण चावला ने यूनिवर्सिटी कैंपस और बारी पार्क के बाद भीड़ को देखते हुए मोरहाबादी मैदान में रावण दहन होने लगा। स्वर्गीय लाला खिलद राम भाटिया, स्व. मनोहर लाल, स्व. कृष्ण लाल नागपाल, स्व. अमीर चंद सतीजा और स्व. अशोक नागपाल ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। रावण का पहला पुतला अपने हाथों से स्व. अमीरचंद सतीजा ने बनाया था। बैठक में विशाखा खन्ना, मोहित चोपड़ा और कमल चोपड़ा को बिरादरी का नया सदस्य बनाया गया। बैठक में अध्यक्ष राजेश खन्ना, सुधीर उग्गल, मुकुल तनेजा, अरुण चावला, अनिल वर्मा, टीआर आनंद, अनुप वाधवा, विनोद माकन, चरणजीत मुंजाल और राजेश मेहरा शामिल हुए।

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