क्‍यों लिया गया बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव पर एक्‍शन : केंद्र सरकार

प्रधानमंत्री मोदी को राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए 15 मिनट इंतजार करना पड़ा। इसके बाद मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आए और तुरंत ही चले भी गए। इसके बाद मुख्य सचिव को नई दिल्ली रिपोर्ट करने के लिए कहा गया।

केंद्र सरकार ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को तलब करने के अपने कदम का बचाव किया और सूत्रों के अनुसार अपने स्थानांतरण आदेश को संवैधानिक बताया है। मंगलवार को अलापन को गृह मंत्रालय से आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा। केंद्र सरकार के सूत्रों ने एएनआई को बताया, ‘आदेश पूरी तरह से संवैधानिक है क्योंकि मुख्य सचिव एक आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने अपने संवैधानिक कर्तव्यों की उपेक्षा करना चुना, जिसके परिणामस्वरूप पश्चिम बंगाल सरकार का कोई भी अधिकारी प्रधानमंत्री की समीक्षा बैठक में शामिल नहीं हुआ।’

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी को राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए 15 मिनट इंतजार करना पड़ा। इसके बाद मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आए और तुरंत ही चले भी गए। इसके बाद मुख्य सचिव अलपन को कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), नई दिल्ली को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। लेकिन इसके एक दिन बाद ही उन्होंने मुख्य सचिव के रूप में अपने पद से सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में उनके मुख्य सलाहकार के रूप में शामिल हो गए।

केंद्र ने तब ममता पर बंद्योपाध्याय को अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचाने का आरोप लगाया था। सरकार की तरफ से कहा गया किमुख्य सचिव की सेवानिवृत्ति से पता चलता है कि ममता बनर्जी बैकफुट पर हैं। वह जानती हैं कि मामले के तथ्य मुख्य सचिव के खिलाफ हैं और उनपर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि वह एक आइएएस अधिकारी हैं। ममता यह सब जानती हैं और उनकी सेवानिवृत्ति उन्हें बचाने के लिए किया गया काम है।’

सरकारी सूत्रों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों का भी खंडन किया कि उन्हें समय पर प्रधानमंत्री की बैठक के बारे में सूचित नहीं किया गया था। सूत्रों ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी को बैठक से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी, जैसा कि उन्होंने दावा किया था। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चक्रवात के बाद की स्थिति का जायजा लेने के लिए पश्चिम मेदिनीपुर जिले में समीक्षा बैठक की थी। बैठक में ममता बनर्जी शामिल होने वाली थीं। हालांकि, वह 30 मिनट की देरी से पहुंची और उसे चक्रवात यास के प्रभाव से हुए नुकसान की रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद वह और राज्य के मुख्य सचिव बैठक से रवाना हो गए।

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